❇️ राजस्थान वैवाहिक रीति रिवाज ✅



▪️इकताई :- वर की अंगरखी, कुर्ता व चूड़ीदार पायजामा (सब गुलाबी रंग के कपडे) बनाने के लिए दर्जी मुहुर्त से नाप लेता है। ये निकासी पर पहने जाते है ।

▪️निकासी :- वर अपने संबंधियो व मित्रो के साथ वधू के घर की ओर प्रस्थान करता है। इसे "जान चढाना" या "निकासी" कहते हैं ।

▪️चाक-भात :- विवाह से एक दिन पहले दूल्हे-दुल्हन के मामा की ओर से वस्त्राभूषण परिवार वालो को भेंट किए जाते है वह भात कहलाता है।

▪️तोरण :- जब वर कन्या के घर प्रथम बार पहुँचता है तो घर के दरवाजे पर बँधे तोरण को घोडी पर बैठे हुए छडी या तलवार द्वारा सात बार छूता है। तोरण मांगलिक चिन्ह होता है।

▪️जांनोटण :- वर पक्ष की ओर से दिया जाने वाला भोज ।

▪️पाणिग्रहण :- वर और वधू को मामा ले जाकर वधू व वर के हाथो में मेहंदी रखकर हाथ जोड़े जाते हैं। इसे हथलेवा कहते है । सात फेरो के पश्चात् वैध रूप से विवाह पूर्ण समझा जाता है ।

▪️मायरा :- अपने लड़के / लड़की के विवाह पर माता अपने पीहर वालो को न्यौता भेजती है तब पीहर वाले अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार उसे जो कुछ देते हैं, उसे मायरा या भात भरना कहते है

▪️पहरावणी :- बारात बिदा करते समय प्रत्येक बाराती तथा वर-वधू को यथा शक्ति धन व उपहारादि दिये जाते हैं, जिसे पहरावणी कहते है ।

▪️ओझण :- बेटी को फेरी के बाद दिया जाने वाला दहेज |

▪️लडार :- कायस्थ जाति में विवाह के 6 वें दिन वधू पक्ष की ओर से वर पक्ष को दिया जाने वाला बडा भोज ।

▪️हीरावणी - विवाह के दौरान दुल्हन को दिया गया कलेवा |

▪️हथबोलणी :- दुल्हन का प्रथम परिचय
Previous
Next Post »