मरूस्थलीय प्रदेश का विस्तार : अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी ढाल से भारत-पाक की अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक लगभग 2 लाख 9 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में है।
मरूस्थलीय प्रदेश (थार मरूस्थल) का क्षेत्रफल राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का 60 प्रतिशत है।
मरूस्थलीय प्रदेश (थार मरूस्थल) में राजस्थान की 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा प्राकृतिक विभाग - उतरी-पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश (थार मरूस्थल)।
मरूस्थलीय प्रदेश का पूर्वी भाग कहलाता है - मारवाड़ ।
मरूस्थलीय प्रदेश का पश्चिमी भाग कहलाता है - थार का मरूस्थल।
मरूस्थलीय प्रदेश का बालुका रहित क्षेत्र हैध् बालुका स्तूप मुक्त क्षेत्र - पोकरण, द.प. फलौदी व जैसलमेर के चारों ओर का क्षेत्र।
पथरीले मरूस्थल को ‘हम्माद’ व मिश्रित (चट्टानी) मरूस्थल को ‘रैग’ कहा जाता है।
रेतीले मरूस्थल का विस्तार किन-किन जिलों में है - जैसलमेर-बाड़मेर-बीकानेर।
पथरीले मरूस्थल (हम्माद) का विस्तार है - जोधपुर-जैसलमेर-बाड़मेर-जालौर जिले का कुछ भाग
शुष्क मरूस्थलीय भाग का विस्तार -जैसलमेर-बाड़मेर-बीकानेर-जोधपुर-जालौर।
अर्द्ध शुष्क मरूस्थलीय भाग का विस्तार व इनके उपभाग -
नागौरी उच्च भूमि - नागौर
शेखावाटी - चुरू-झुंझुनू-सीकर
वोल्गा क्षेत्र - गंगानगर-हनुमानगढ
लूनी-जवाई - जालौर-सिरोही-पाली
उतरी-पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश की सीमा 644 किमी व पूर्वी सीमा 360 किमी लंबी है।
अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी भाग अर्थात उतरी-पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश में आने वाले जिलों की संख्या - 13 जिले।
जैसलमेर के उतर व पोकर के दक्षिण में फैले ‘बालुका स्तूप मुक्त क्षेत्र’ को कहते है - रन।
थार मरूस्थल में बालुका स्तूपों के बीच में कहीं-कहीं निम्न भूमि मिलती है जिसमें वर्षा का जल भर जाने से अस्थायी झीलों का निर्माण हो जाता है, इन्हे कहा जाता है - रन या टाट।
राजस्थान के किन दो जिलों में ‘रन’ का बाहुल्य है - जैसलमेर व जोधपुर में।
संपूर्ण रेतीला मरूस्थल कहलाता है - इर्ग।
प्राचीन काल में थार मरूस्थल टैथिज महासागर का भाग था।
थार मरूस्थल में पवनों की दिशा के समानान्तर बनने वाले अनुदैध्र्य बालुका स्तूपों का सर्वाधिक विस्तार किस जिले में है - जैसलमेर में।
थार मरूस्थल में पवनों की दिशा के लंबवत या समकोण बनाने वाले ‘अनुप्रस्थ बालुका स्तूपों’ का सर्वाधिक विस्तार वाला जिला है - बाड़मेर।
राजस्थान का पूर्णतः वनस्पति रहित क्षेत्र समगांव (सम के धोर) किस जिले में स्थित है - जैसलमेर
राजस्थान में पूर्ण मरूस्थल वाले दो जिले - जैसलमेर-बाड़मेर।
उतरी-पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश के लगगभ 58 से 60 प्रतिशत भू भाग पर बालूका स्तूपों का विस्तार है।
राजस्थान का 60 प्रतिशत से अधिक भाग (61.11 प्रतिशत) मरूस्थलीय है।
राष्ट्रीय कृषि आयोग द्वारा घोषित राजस्थान के 12 मरूस्थलीय जिले - 1. गंगानगर, 2. हनुमानगढ, 3.बीकानेर, 4.चुरू, 5. झुंझुनू, 6. सीकर, 7.नागौर, 8. जोधपुर, 9.जैसलमेर, 10. पाली, 11. बाड़मेर, 12. जालौर।
राजस्थान के उतरी-पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश (थार मरूस्थल) में पाये जाने वाले अर्द्ध चंद्राकार बालूका स्तूप, जो श्रृंखलाओं में गतिशील एवं मरूस्थल के प्रसार हेतु सर्वाधिक उतरदायी होते है, कहलाते है - बरखान।
जैसलमेर जिले के रूद्रवा व रामगढ में चट्टानी/मिश्रित मरूथल पाया जाता है।
थार मरूस्थल की उत्पति का सबसे प्रभावशाली कारण है - शुष्कता में वृद्धि।
राजस्थान का थार मरूस्थल पर्मोकार्बोनिफेरस युग में टैथिज सागर का अंग था, इस तथ्य की पुष्टि करने वाले तत्व है - आकल जीवाश्म पार्क, जलोद्भिद, तलछट व लिग्नाइट, खनिज तेल और प्राकृतिक गैस का जमाव आदि।
राजस्थान में मरूस्थलीकरण का मुख्य कारण है - भूमि का अलाभप्रदकर उपयोग।
अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में स्थित 13 जिलों में से सिरोही को छोड़कर शेष सभी मरूस्थलीय है।
राजस्थान का थार मरूस्थल अरावली पर्वतमाला के/से उतर-पश्चिम दिशा में विस्तृत है।
राजस्थान के उतरी-पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश का सामान्य ढाल पूर्व से पश्चिम तथा उतर से दक्षिण की ओर है।
राजस्थान का सबसे शुष्क स्थान - फलौदी।
थार मरूस्थल पेलियो आर्कटिक अफ्रीका मरूस्थल का ही पूर्वी भाग है।
लूनी-जवाई बेसिन को किस क्षेत्र के नाम से जाना जाता है - गौड़वाड़ से।
रन का सर्वाधिक बाहुल्य वाला जिला है - जैसलमेर
किस जिले में सभी प्रकार के बालुका स्तूप देखने को मिलते है - जोधपुर।
राजस्थान के पश्चिमी रेतीले मैदान में लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र पर बालूका स्तूप पाए जाते है।
बरखान - अर्द्धचंद्राकार ।
आकृति के गतिशील बालूका स्तूप राजस्थान के पश्चिमी रेतीले मैदान की शैले किस भू-गर्भिक काल की है - जुरैसिक व इयोसिन युग की।
घग्घर मैदान गंगानगर जिले के 3/4 भाग में विस्तृत है।
‘खड़ीन’: जैसलमेर के उतरी भाग में बड़ी संख्या में स्थित प्लाया झीलें, जो प्रायः निम्न कगारों से घिरी रहती है।
रन: बालूका स्तूपों के बीच की निम्न भूमि में वर्षा जल के भर जाने से निर्मित अस्थाई झीले व दलदली भूमि।